• Rashtravani Praveshika 2
भाषा अभिव्यक्ति का साधन है और ज्ञान ग्रहण करने का माध्यम भी। बालक के व्यक्तित्व के समुचित विकास और उसके अध्ययन मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए यह आवश्यक है कि वह अपनी अभिव्यक्ति की भाषा पर समुचित अधिकार स्थापित कर सके। इस कार्य हेतु बालक के भाषा-शिक्षण पर प्रारंभ से ही पूरा-पूरा ध्यान देने की आवश्यकता है।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार संपूर्ण देश के प्राथमिक विद्यालयों में हिदी को एक अनिवार्य विषय के रूप में मान्यता दी गई है ताकि बच्चा आरंभ से ही हिदी भाषा में रुचि ले। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा पारित विद्यालयी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय केंद्रिक बिदुओं के आधार पर हमने निम्नलिखित पुस्तकों का प्रकाशन किया है
1- राष्ट्रवाणी प्रवेशिका भाग - 1
2- राष्ट्रवाणी प्रवेशिका भाग - 2

उपर्युक्त पुस्तकों की प्रमुख विशेषताएँ:

  •  भाषा के चारों कौशलों - सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना पर समान बल।
  •  प्रवेशिका-1 में रंगीन चित्रें के माध्यम से वर्णों (स्वर-व्यंजन) का ज्ञान कराया गया है। संयुक्ताक्षरों (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र) का भी परिचय कराया  गया है।
  •  सभी वर्णों की लेखन-विधि भी सरलतम रूप में प्रस्तुत की गई है। छात्रें के लेखन-कार्य हेतु पर्याप्त स्थान भी दिया गया है।
  •  अर्जित ज्ञान को संपुष्ट करने के लिए बीच-बीच में रोचक अभ्यास भी दिए गए हैं।
  •  प्रवेशिका भाग-2 में दो, तीन और चार वर्णों से निर्मित होने वाले अमात्रिक शब्दों का रंगीन चित्रें के माध्यम से ज्ञान कराया गया है।
  •  वर्णों के प्रत्यास्मरण के लिए सरल व रोचक अभ्यास प्रवेशिका भाग-2 के आरंभ में दिए गए हैं।
  •  सरलतम विधि द्वारा अमात्रिक शब्दों से निर्मित वाक्यों के पठन तथा लेखन की समुचित सामग्री दी गई है।
  •  पढ़ने के अभ्यास के लिए कुछ अतिरिक्त पृष्ठों का भी समावेश किया गया है।
  • विद्यार्थियों के शब्द-भंडार में वृद्धि, मौखिक अभिव्यक्ति का विकास तथा व्याकरण के कुछ तथ्यों का अनौपचारिक रूप से ज्ञान कराने हेतु मनोरंजक पाठ्य-सामग्री का समावेश भी किया गया है।
  • विद्यार्थियों की ग्रहण-क्षमता तथा वय-वर्ग के आधार पर अभ्यासों की रचना की गई है।

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Rashtravani Praveshika 2

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